मनसुन समयभन्दा अगावै भित्रिएपछि धान रोपाइँमा वृद्धि
काठमाडौँ, २५ असार – यस वर्ष मनसुन समयभन्दा करिब १५ दिनअगाडि भित्रिएपछि देशभर धान रोपाइँको गति बढेको छ। कृषि विभागका अनुसार २५ असारसम्म मुलुकभर ४५.०३ प्रतिशत रोपाइँ सम्पन्न भइसकेको छ, जुन गत वर्षको सोही अवधिको तुलनामा १.५३ प्रतिशतले बढी हो। गत वर्ष सोही अवधिमा ४३.५० प्रतिशत रोपाइँ भएको थियो।
प्रदेश अनुसार रोपाइँको स्थिति
कृषि विभागले दिएको विवरण अनुसार १३ लाख ८३ हजार ७३२ हेक्टर कुल धान क्षेत्रफलमध्ये हालसम्म ६ लाख २३ हजार १०४.४७ हेक्टरमा रोपाइँ सम्पन्न भएको छ। प्रदेशगत रोपाइँ विवरण यसप्रकार छ:
| प्रदेश | कुल क्षेत्रफल (हेक्टर) | हालको रोपाइँ (हेक्टर) | प्रतिशत (%) | गत वर्ष (%) |
|---|---|---|---|---|
| कोशी | २,७६,३८६.७३ | ८१,६३४.९ | २९.५४ | ३४.४० |
| मधेस | ३,७२,६४५ | ९३,४६८.२ | २५.०८ | २५.५० |
| बागमती | १,२०,५४५ | ६२,५६१ | ५१.९० | ४१.०० |
| गण्डकी | ९४,१८२ | ५२,३५३ | ५५.६० | ४९.७० |
| लुम्बिनी | ३,०२,९३९ | १,५७,८५७ | ५२.१० | ४४.४० |
| कर्णाली | ४०,८८४ | २९,२९९ | ७१.७० | ७८.०० |
| सुदूरपश्चिम | १,७६,१५१ | १,४५,९३२ | ८२.८० | ८६.०० |
सुदूरपश्चिम प्रदेशमा सबैभन्दा धेरै (८२.८०%) रोपाइँ सम्पन्न भएको छ भने मधेस प्रदेशमा सबैभन्दा कम (२५.०८%) रोपाइँ भएको देखिन्छ।
मनसुन र वर्षाको अवस्था
जल तथा मौसम विज्ञान विभागका अनुसार यस वर्ष मनसुन जेठ १५ गते पूर्वी नेपालबाट भित्रिएको थियो, जुन सामान्यभन्दा १५ दिन अगाडि हो। असार ६ गतेसम्म देशभर फैलिएको मनसुनको कारण धान रोपाइँमा सकारात्मक असर परेको छ।
हालसम्म देशभर ३५२.० मिमि (२३.८%) वर्षा भएको छ। जुन महिनामा मात्रै ९९ प्रतिशत सरदर वर्षा भएको विभागको विश्लेषण छ। प्रवक्ता विभूति पोखरेलका अनुसार कतिपय स्थानमा औसतभन्दा बढी वर्षा भएको छ भने कतै कम भएको छ।
जुलाई–सेप्टेम्बर अवधिको वर्षा पूर्वानुमान:
-
बढी वर्षा हुने सम्भावना (५५–६५%):
-
कर्णाली प्रदेशको पूर्वी भू–भाग
-
लुम्बिनीको उत्तरी भाग
-
गण्डकीको अधिकांश भू–भाग
-
-
४५–५५% सम्भावना:
-
सुदूरपश्चिमको दक्षिणी भाग
-
लुम्बिनीको पश्चिमी भाग
-
बागमती र कोशीको उत्तरी भू–भाग
-
-
३५–४५% सम्भावना:
-
सुदूरपश्चिमको उत्तरी भाग
-
बागमतीको दक्षिणी भाग
-
मधेसको पूर्व-मध्य भू–भाग
-
धान उत्पादनमा वृद्धि
कृषि मन्त्रालयका अनुसार आर्थिक वर्ष २०८१ मा नेपालमा ५९ लाख ५५ हजार ४७६ मेट्रिकटन धान उत्पादन भएको छ, जुन २०८० सालको तुलनामा ४.०४ प्रतिशतले बढी हो। प्रदेशगत उत्पादन यसप्रकार छ:
| प्रदेश | उत्पादन (मेट्रिकटन) |
|---|---|
| कोशी | १४,६६,५१८ |
| मधेस | १४,८०,८३० |
| बागमती | ४,९८,६३२ |
| गण्डकी | ३,७९,०३२ |
| लुम्बिनी | १३,६४,०३१ |
| कर्णाली | १,३०,१९१ |
| सुदूरपश्चिम | ६,३६,२१२ |

